Saturday, April 28, 2012

मेरी आँखों में देखने की कोशिश न करना

मेरी आँखों में देखने की कोशिश न करना
इनमे तुम्हे अपने लिए दीवानगी नज़र आएगी
मेरे चेहरे को पढने की कोशिश जो करोगे
तुम्हे भी मेरी बेइन्तेहाँ चाहत हो  जायेगी


दोस्तों की भीड़ में खोयी हुई समझना
हर ग़म से बेखबर हो सोयी हुई समझना
मेरे दिल में झांकने की कोशिश न करना
दिल दहला देने वाली वीरानगी नज़र आएगी
गर खयालो में मुझे तुम लाने लगोगे
तुम्हे भी फिर मेरी आदत हो जायेगी


बेवज़ह की कोई पहचान ही समझना
मुझे तुम अजनबी अनजान ही समझना
मेरे अल्फाजो को महसूस करने की कोशिश न करना
बस तुमसे ही जुड़ी तिश्नगी नज़र आएगी
मेरे जज्बातों को समझने की कोशिश जो करोगे
तुम्हे भी मुझसे बेपनाह मुहब्बत हो जायेगी

- स्नेहा गुप्ता  
00:45 A.M. 28/04/2012 
  

10 comments:

  1. Awwww.. This is so mesmerisingly beautiful.. Loved it..

    "मेरी आँखों में देखने की कोशिश न करना
    इनमे तुम्हे अपने लिए दीवानगी नज़र आएगी" This is just breath taking line Sneha.. Good work:)

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  2. मेरे जज्बातों को समझने की कोशिश जो करोगे
    तुम्हे भी मुझसे बेपनाह मुहब्बत हो जायेगी

    वाकई में क्या खूबसूरत जज्बात होंगें स्नेहा जी.
    उन्हें समझने की कोशिश उनको करनी ही चाहिये.

    भावमय प्रस्तुति के लिए आभार.
    मेरे ब्लॉग पर आपका हार्दिक स्वागत है.

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    1. Bahut bahut shukriya sir

      haardik swaagat hai aapka mere blog par

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  3. Replies
    1. bahut bahut dhanyawaad jenni madam. aap mere blog par aayi, mera maan badh gaya..

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  4. स्नेहा जी बहुत खूब बहुत अच्छी
    मैं आपके ब्लॉग पे पहली बार आया हूँ
    बहुत अच्छा लगा आपके ब्लॉग पे आने से
    कभी फुर्सत में मेरे ब्लॉग के मेम्बर भी बने और अपनी राय जरुर देवे
    http://dineshpareek19.blogspot.in/

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  5. bahut bahut dhanyawaad dinesh ji. aapko blog achcha laga jaankar khushi hui. mere blog par aapka swaagat hai...

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  6. स्नेहा जी बहुत अच्छा बहुत खूब लिखा है आपने दिल से लिखा है Er.Verma

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    1. शुक्रिया विनोद जी :)

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मेरा ब्लॉग पढ़ने और टिप्पणी देने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद.